Friday, June 8, 2012

Hello Varanasi

हेलो फ्रेंड्स!!!
I am back after a long time!!!!
आप सबको तो पता ही होगा कि मेरे ग्रीष्म अवकाश चल रहे हैं...  
नहीं? तो चलिए मैं आप सबको अभी बता देती हूँ...

4 मई '12 से मेरे ग्रीष्म अवकाश शुरू हो गए थे और फिर 6 मई की ट्रेन से हम (मैं, माँ, पापा और भाई) दिल्ली आ गये (गांधीधाम से वाराणसी डाइरेक्ट रिज़र्वेशन नहीं था)| और वहाँ प्रशांत मामा हम सब का इंतज़ार कर रहे थे... हमारे स्टेशन पहुँचते ही उन्होंने हम सबको रिसीव किया...लेकिन दिल्ली से बनारस की ट्रेन में तो पाँच घंटे बाक़ी थे और हम सब के पेट में चूहे कूदने लगे...इसलिए हम सब दिल्ली के एक रेस्टुरेंट में गए- पिंड बलूची ....फ्रेंड्स! पता है... मैं आप सबके साथ वहाँ के कुछ फ़ोटोज़ शेयर करना चाहती थी...पर कुछ प्रॉब्लम की वजह से नहीं कर पाई...कोई बात नहीं, तब-तक आप मरे वहाँ के वर्णन से ही काम चला लीजिए...

आहा!! भूखे पेट में जब खाना गया तो आराम मिल गया....ह्म्म्म, अब तो हमारी ट्रेन का समय हो गया है....बाय-बाय दिल्ली...अब मैं चली बनारस- मेरे नाना- नानी के घर....कुछ ही देर बाद ट्रेन आ गई और हम उसमे सवार  हो गए..रात को आराम से सोने के बाद हम पहुँच गए बनारस (वाराणसी)!!!


अब आप सब सोच रहे होंगे कि यदि मैं 8 मई को ही बनारस पहुँच गई थी तो आप सब से मेरी इतने दिनों तक बात कैसे नहीं हो पाई? क्या बताऊँ फ्रेंड्स! बनारस में लाईट की काफी प्रॉब्लम है इसलिए मैं आप लोगों से बातें नहीं कर पाई...और अब मेरी छोटी-सी बहना (मेरे प्रशांत मामा की बेटी) बड़ी हो गयी है इसलिए मेरा ज़्यादा समय उसी के साथ बीत जाता है..अरे-अरे आप ये मत समझिए कि छुट्टियों में मैं सिर्फ अपना समय खेलने में ही बिताती हूँ...मैं पढ़ाई भी करती हूँ....वैसे, I am Sorry!!! लेकिन अब तो मैं वापस आ गई हूँ...बातों का पिटारा लेकर....तो चलिए शुरू करें...


दोस्तों क्या अप सब को याद है कि 13 मई को क्या था? जी हाँ अपने ठीक समझा..13 मई को था मदर्स डे (Mother's Day) यानी हमारी प्यारी- प्यारी माओं का दिन!!! और ऐसे में मैं अपनी माँ को कुछ गिफ़्ट कैसे न देती ? आइये आपको दिखाऊँ कि मैंने अपनी प्यारी -प्यारी माँ को क्या गिफ़्ट किया....








तो फ्रेंड्स कैसा लगा आपको मेरी माँ के लिए ये गिफ़्ट? ये थे वो तीन पेज, जिस पर मैंने अपनी प्यारी माँ के लिए अपने हाथों से लिखी थी ये कविता....मैं अपनी माँ के बारे में जो भी सोचती हूँ उसे यहाँ लिख दिया...क्या आप सब भी अपनी माओं के लिए यही सोचते हैं? मेरी माँ ही मेरी सब-कुछ हैं और उन्हें ये बताने के लिए मेरी टूटी-फूटी भाषा में ये थी मेरी एक कोशिश.....


अच्छा फ्रेंड्स अब मैं चलती हूँ वर्ना ''Electricity'' बहना दोबारा चली जाएँगी..:) और हाँ! आप सब भी मुझे बताइयेगा कि आप सबने मदर्स डे पर अपनी माँ के लिए क्या किया...O.K? और हाँ आज के लिए एक प्रॉमिस- नेक्स्ट टाइम आपसे जल्दी मिलूंगी..


बाय-बाय!!!

5 comments:

  1. बहुत खूब लिखा है..

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  2. बहुत प्यारा गिफ्ट दिया डियर !
    बहुत अच्छा लगा रूनझुन।

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  3. बहुत प्यारा गिफ्ट माँ को....शुभकामनायें !

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  4. बहुत सुन्दर लिखा है .... शुभाशीष !

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  5. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 25 फरवरी 2017 को लिंक की जाएगी ....
    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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आपको मेरी बातें कैसी लगीं...?

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