Friday, October 12, 2012

''बाल साहित्यकार- डॉ. श्रीप्रसाद नाना जी हमारे बीच नहीं रहे !!!!''



प्रिय दोस्तों,


आज जब मुझे ये खबर प्रतिमा मौसी से मिली तो मैं हतप्रभ रह गयी... कुछ देर तक तो लगा जैसे मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है.... मुझे तो जैसे इस खबर पर विश्वास ही नहीं हो पा रहा है... 


अभी तो जून में मैं नानाजी से मिली थी.... उनके साथ हमने कितनी सारी मस्ती की थी...नानाजी की वह आवाज़... नानाजी का कविताएँ सुनाने का ढंग... सब कुछ मेरे कानों में अभी भी गूंज रहा है... नानाजी कविताएँ सुनाते वक्त उनमें खो जाते थे....बिलकुल हम बच्चों की तरह.... इस साल जब मैं नानाजी से मिली थी तो मुझे पहले से भी ज्यादा मज़ा आया था.... उन्होंने हमें ढेर सारी कहानियाँ और कविताएँ सुनाई थीं... इस बार मैंने नानाजी से वादा किया था की मैं अगले वर्ष और ढेर सारी कविताएँ, कहानियां और वो सारी तुकबंदियाँ लेकर आउंगी... लेकिन....

पता है दोस्तों,  उन्होंने मेरे ब्लॉग और मेरे लेखन को बहुत पसंद किया था, कहा था, ''बहुत अच्छा, ऐसे ही लिखती रहो..'' मैं ये बात सोच भी नहीं पा रही हूँ कि नानाजी अब नहीं हैं... जब मैं उनसे मिली थी तो उसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली जाना था क्योंकि 16 जून को उन्हें वहाँ पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए बुलाया गया था... और इस बार उसी दिल्ली में जाकर नानाजी हम सब से बहुत-बहुत दूर चले गए... 

  
हम बच्चों के साथ हँसते-खिलखिलाते नानाजी की ये तस्वीर मात्र चार महीने पुरानी है... इसे देखकर अभी-भी वो सारे पल मेरी आँखों के सामने आ जा रहे हैं... क्या मैं अब नानाजी से कभी नहीं मिल पाऊंगी..????

नहीं, हम बच्चों के प्यारे नानाजी जहाँ कहीं भी हों उनका प्यार और आशीर्वाद उनकी अमर कृतियों के माध्यम से हमेशा हमारे साथ रहेगा... मैं और तो कुछ नहीं कर सकती बस भगवान् से इतनी ही प्रार्थना है कि भगवान नानाजी की आत्मा को शांति प्रदान करें !!!  


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