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Wednesday, September 5, 2012

शत-शत नमन...!!!



गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः |
गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः ||


सभी गुरुजनों को शिक्षक दिवस पर शत-शत नमन !!!

मित्रों, सबसे पहले बहुत सारा ''SORRY!!'' ( इतने दिनों तक आप सबसे दूर रहने के लिये).... मेरे 2nd Unit Test प्रारंभ हो गए हैं और इसलिए आज-कल मैं उसमें बिज़ी हूँ.... लेकिन आज मैंने आप सबसे बातें करने के लिए थोड़ा सा वक़्त निकाल ही लिया... "5 सितम्बर" का दिन हम विद्यार्थियों के लिए बहुत विशेष होता है.... ये वो दिन होता है जब हमें अपने टीचर्स के प्रति अपने प्यार और सम्मान को विशेष रूप से व्यक्त करने का मौका मिलता है... इस दिन को मनाने की शुरुआत कैसे हुई आइये जानते हैं.... 

हमारे देश के द्वितीय राष्ट्रपति- डॉ.  सर्वपल्ली राधाकृष्णन अपना जन्मदिन नहीं मनाया करते थे...एक बार उनके कुछ मित्रों और विद्यार्थियों ने उनसे उनका जन्मदिन मनाने की इजाज़त माँगी तो राधाकृष्णन ने कहा कि उनका जन्मदिन अलग से मनाने की बजाय यदि वे इस दिन (5 सितम्बर) को शिक्षक दिवस के रूप में मनाये तो उन्हें ज़्यादा खुशी होगी...और तभी से भारत में 5 सितम्बर को ''शिक्षक दिवस'' के रूप में मनाया जाने लगा...

हर बार तो इस दिन हमारी छुट्टियाँ रहती थीं लेकिन इस बार हमें स्कूल में इस दिन को सेलीब्रेट करने मौका मिल रहा है... इसलिए इस दिन के लिए हमने कुछ विशेष तैयारियां की हैं... हमारी क्लास के सारे बच्चों ने मिलकर टीचर्स के लिए कार्ड्स बनाये हैं और हमने अपनी टीचर्स के लिए एक सरप्राइज़ डांस भी तैयार किया है.... 

कुछ कार्ड्स जो मैंने अपनी टीचर्स के लिए बनाये हैं, आप भी देखिये...









आपको मेरे बनाये कार्ड्स कैसे लगे मुझे ज़रूर बताइयेगा....




Wednesday, August 15, 2012

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!



झंडा ऊँचा रहे हमारा | विजयी विश्व तिरंगा प्यारा || 


आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

स्वतंत्रता यानि आज़ादी.... भारतवासियों ने बड़ी ही मुश्किलों से सैकड़ों कुर्बानियों के बाद गुलामी की जज़ीरों को तोड़कर आज़ादी हासिल की.... महात्मा गाँधी, चाचा नेहरू जैसे हमारे पूर्वजों के दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस की वजह से आज हम आज़ाद हवा में साँस ले रहे हैं... गुलामी की जलालत भरी जिंदगी से हम कोसों दूर हैं... 
   
हमने अंग्रेजों के जुल्मों से तो मुक्ति पा ली... पर देश में बढ़ते भ्रष्टाचार, अन्याय, हिंसा आदि से हम कब और कैसे मुक्त होएँगे...? शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोस आदि के बलिदान को क्या हम यूँ ही व्यर्थ जाने देंगे...? सीमा पर चौबीसों घंटे भयंकर गर्मी-सर्दी के बीच कठिन दिनचर्या के बीच भी मुस्तैद रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहने वाले हमारे जांबाज़ सैनिकों की तपस्या का क्या हम यही प्रतिफल देंगे...?

नहीं...! हरगिज़ नहीं...!!! हमारा ये भारत वर्ष सारे जहाँ में सबसे अच्छा है और हमेशा रहेगा... इसकी स्वतंत्रता, अखंडता और एकता की सुरक्षा हम स्वयं करेंगे... सारी बुराइयों को दूर हटाकर एक सुन्दर निष्कलंक राष्ट्र की स्थापना करेंगे... और इसकी शुरुआत हमें खुद से ही करनी होगी... हम खुद सच्चे और सही मार्ग पर चलेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे.... 

हम दुनिया के किसी भी कोने में चले जाये... हमारी पहचान न हिन्दू होगी. न मुसलमान, न सिक्ख, न ईसाई..... हम होंगे सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दुस्तानी !!!
तो चलिए एक बार हम सब मिलकर बोलें-----

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा !!
जय हिंद !!! 

Monday, August 6, 2012

Hiroshima day

                                                             Picture courtesy:  Google
                         
आज हिरोशिमा डे है... पता है हिरोशिमा डे का अर्थ क्या है?...

द्वितीय विश्व युद्ध  (IInd World War ) के समय 1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहर- हिरोशिमा तथा नागासाकी पर परमाणु बम गिराया था| इस खतरनाक बम ने जैसे ही इन दो शहरों की धरती को छूआ, चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मच गयी... न जाने कितने बच्चे, औरतें, आदमी, जीव-जंतु, वनस्पति उस तबाही में मारे गए... उन दोनों शहरों में तबाही के बाद कुछ भी न बचा था... न कोई मनुष्य, न कोई जानवर और न ही कोई पेड़-पौधे... सबसे पहले अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर बम गिराया और उसके ठीक तीन दिन बाद यानि 9 अगस्त को परमाणु बम ने नागासाकी की भूमि पर तबाही मचा दी... मैंने जब उस भयंकर तबाही के दिल- दहला देने वाले चित्र देखे तो मेरी आखों से आँसू निकल गए...

दोस्तों, विज्ञान हमारी प्रगति और उन्नति का प्रतीक है... लेकिन आज हम विज्ञान का सदुपयोग करने की जगह दुरुपयोग कर रहे हैं... खतरनाक बमों का निर्माण कर अपने ही दोस्तों... अपने ही साथियों को मारने में भला कैसी खुशी... ?.... अनगिनत जीवन को मृत्यु में परिवर्तित कर भला कैसा सुकून....?....कैसी शांति...? 
क्या अपनी शक्ति का यूँ प्रदर्शन करना या फिर खुद को शक्तिशाली सिद्ध करने के लिए अनगिनत प्राणों की आहुति दे देना ज़रूरी है..?....

आज हमें विज्ञान का सही उपयोग करने की शपथ लेनी ही होगी...... लेनी ही होगी... और यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी उस भयानक तबाही में मारे गए अनगिनत प्राणियों के प्रति....!!!



Sunday, August 5, 2012

दोस्ती का दिन....


मेरे सारे दोस्तों को दोस्ती का ये दिन मुबारक हो!!!


Everyone on this Earth need a helpful, lifelong friend. No one can stay alone. So, today's day is dedicated to all my dear friends...Happy friendship day!!!!


In today's busy schedule, many of us, depart from our friends. So, to enjoy at least one day with our wonderful and special friends, US Congress in 1935 declared first Sunday of August as  Friendship Day.


Friendship is the only relationship which depends on our likes and dislikes. Friendship is the strong bond that depicts the relation between two unknown human which turn into best friends. It doesn't means to have a crowd which are not really your best companions. You can have a single one- The one which cares about you- the one who stands beside you in every circumstances- The one who corrects you- the one who appreciates you and the one with whom you can share everything!!!


I also have few companions whom I call as my friends...No matter we live miles away but we'll be always close...:)..I love you my friends...


ये है मेरी दोस्त सिमरन जो पटना में क्लास 2 में मेरे साथ थी...
क्लास के बच्चों की इतनी बड़ी भीड़ में ये मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी...!!!!

और....ये है - स्निग्धा 
वैसे मैं इसे प्यार से छोटी, मोटी और अन्य कई नामों से भी पुकारती हूँ :)
पटना में हम दोनों एक ही अपार्टमेंट में रहते थे

ये है किंजल, क्लास 4 में हम दोनों की फ्रेंडशिप हुई, 
इस बार हमारा सेक्शन चेंज हो गया है लेकिन फिर भी 
हम लंच ब्रेक में और एक दूसरे के घर जाकर ढेरों मस्ती करते हैं...

Apart from these, I have some amazing friends which cannot speak but are there with me whenever I need them...
They are the magnificent gift of nature. They are always beside me in every difficulties. Whenever I am tired of walking, they provide me shade...When I am sick, they provide me medicines...Ah! and how can I forget the juicy fruits, they give me... and also they make our world green and help us to stay healthy and clean. So, trees are my best friends- actually, trees are not only my best friends but also the friends of every living being....Therefore save our precious friends...


और फ्रेंड्स...पता है, मेरे सबसे बड़े दोस्त कौन है? उनसे तो मैं अपना सब कुछ शयेर करती हूँ...वे दिनभर मेरे साथ रहते हैं और मुझे डाँटते हैं, हँसाते हैं, और खूब सारा प्यार भी करते हैं और बहुत कुछ सिखाते भी हैं .....जी हाँ ! वो हैं मेरे मम्मी-पापा, भाई और साथ ही साथ आप सब भी.... 


So to all of you  A Very-Very HAPPY FRIENDSHIP DAY!!!








Monday, June 18, 2012

Father's Day

हेलो फ्रेंड्स!!
कैसे हैं आप सब??... मेरी गर्मी की छुट्टियाँ अब समाप्त हो गयी... हम वाराणसी से 14 जून, 2012 को चल कर 16 जून को वापस गाँधीधाम आ गए... आज मेरे स्कूल का छुट्टियों के बाद पहला दिन था.. मुझे बहुत मज़ा आया... इन छुट्टियों की बहुत सारी बातें आपसे शेयर करनी है लेकिन सबसे पहले मैं कल की बातें करना चाहती हूँ....जी हाँ कल यानि 17 जून, 2012 जो एक बहुत ही खास दिन था... आपको भी तो पता है न कि कल था... पितृ-दिवस.. मतलब ''फ़ादर्स डे'' (Father's Day)... तो फ्रेंड्स, किसी भी इवेंट के पहले हम सब क्या करते हैं....?.... जी हाँ.... उसके बारे में जानते हैं.... तो आइये कुछ जाने फ़ादर्स डे के बारे में...

''फ़ादर्स डे'' के दिन मैं सुबह टी.वी देख रही थी तभी मैंने एक कहानी पढ़ी तो सोचा कि आप सब से भी शेयर कर लूँ...
फ़ादर्स डे कैसे शुरू हुआ?
बहुत साल पहले यू.एस.ए. में ''सोनारा डोड'' नामक एक लड़की रहती थी.. उसकी माँ का निधन हो गया था और वो अपने पापा और 5 भाइयों के साथ रहती थी.. एक दिन रविवार को वो अपने पापा के साथ चर्च गयी और वहाँ पर उसे ''मदर्स डे'' के बारे में पता चला.... और तब उसने सोचा कि यदि मदर्स डे होता है तो एक दिन हमारे पिताओं को भी समर्पित होना चाहिए... उसने फ़ादर्स डे मनवाने का दृढ़ निश्चय कर लिया और एक औपचारिक पत्र भी भेजा... आखिरकार सन 1923 में फ़ादर्स डे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया... येsssss.....!!! थैंक्यू ''सोनारा डोड'' अगर आप ने फ़ादर्स डे मनाने का दृढ़ निश्चय नहीं किया होता तो आज हमारे पिताओं को एक भी दिन समर्पित नहीं होता...

अब चलिए मैं आपको दिखाती हूँ कि मैंने अपना फ़ादर्स डे कैसे मनाया...
मैंने अपने पापा को एक प्यारा सा कार्ड दिया प्यारे से मैसेज के साथ... 


Dear Father,
You are a great soul.
You always serve us
Your love, care and
many more things
which can't be written...
Your hands are always on me
and when I need them
You give me frequently....

Your ears are always open
to hear our secrets,
and some nonsense
which we whisper in.
Sometimes you go impatient
and punish us too
to make us a great person
like you !!!

'O' Papa,
you are wonderful...
we're gonna love
and obey you...

Have a wonderful day !
Keep smiling !!! 


भाई ने भी पापा को अपने हाथों से बना कार्ड दिया....


है ना बहुत ही प्यारा सा कार्ड !!!


और सचमुच पापा बहुत-बहुत खुश हुए उन्होंने प्यार से हमें गले लगा लिया....


My father is my Hero !!!
He is really Great !!!







Friday, June 8, 2012

Hello Varanasi

हेलो फ्रेंड्स!!!
I am back after a long time!!!!
आप सबको तो पता ही होगा कि मेरे ग्रीष्म अवकाश चल रहे हैं...  
नहीं? तो चलिए मैं आप सबको अभी बता देती हूँ...

4 मई '12 से मेरे ग्रीष्म अवकाश शुरू हो गए थे और फिर 6 मई की ट्रेन से हम (मैं, माँ, पापा और भाई) दिल्ली आ गये (गांधीधाम से वाराणसी डाइरेक्ट रिज़र्वेशन नहीं था)| और वहाँ प्रशांत मामा हम सब का इंतज़ार कर रहे थे... हमारे स्टेशन पहुँचते ही उन्होंने हम सबको रिसीव किया...लेकिन दिल्ली से बनारस की ट्रेन में तो पाँच घंटे बाक़ी थे और हम सब के पेट में चूहे कूदने लगे...इसलिए हम सब दिल्ली के एक रेस्टुरेंट में गए- पिंड बलूची ....फ्रेंड्स! पता है... मैं आप सबके साथ वहाँ के कुछ फ़ोटोज़ शेयर करना चाहती थी...पर कुछ प्रॉब्लम की वजह से नहीं कर पाई...कोई बात नहीं, तब-तक आप मरे वहाँ के वर्णन से ही काम चला लीजिए...

आहा!! भूखे पेट में जब खाना गया तो आराम मिल गया....ह्म्म्म, अब तो हमारी ट्रेन का समय हो गया है....बाय-बाय दिल्ली...अब मैं चली बनारस- मेरे नाना- नानी के घर....कुछ ही देर बाद ट्रेन आ गई और हम उसमे सवार  हो गए..रात को आराम से सोने के बाद हम पहुँच गए बनारस (वाराणसी)!!!


अब आप सब सोच रहे होंगे कि यदि मैं 8 मई को ही बनारस पहुँच गई थी तो आप सब से मेरी इतने दिनों तक बात कैसे नहीं हो पाई? क्या बताऊँ फ्रेंड्स! बनारस में लाईट की काफी प्रॉब्लम है इसलिए मैं आप लोगों से बातें नहीं कर पाई...और अब मेरी छोटी-सी बहना (मेरे प्रशांत मामा की बेटी) बड़ी हो गयी है इसलिए मेरा ज़्यादा समय उसी के साथ बीत जाता है..अरे-अरे आप ये मत समझिए कि छुट्टियों में मैं सिर्फ अपना समय खेलने में ही बिताती हूँ...मैं पढ़ाई भी करती हूँ....वैसे, I am Sorry!!! लेकिन अब तो मैं वापस आ गई हूँ...बातों का पिटारा लेकर....तो चलिए शुरू करें...


दोस्तों क्या अप सब को याद है कि 13 मई को क्या था? जी हाँ अपने ठीक समझा..13 मई को था मदर्स डे (Mother's Day) यानी हमारी प्यारी- प्यारी माओं का दिन!!! और ऐसे में मैं अपनी माँ को कुछ गिफ़्ट कैसे न देती ? आइये आपको दिखाऊँ कि मैंने अपनी प्यारी -प्यारी माँ को क्या गिफ़्ट किया....








तो फ्रेंड्स कैसा लगा आपको मेरी माँ के लिए ये गिफ़्ट? ये थे वो तीन पेज, जिस पर मैंने अपनी प्यारी माँ के लिए अपने हाथों से लिखी थी ये कविता....मैं अपनी माँ के बारे में जो भी सोचती हूँ उसे यहाँ लिख दिया...क्या आप सब भी अपनी माओं के लिए यही सोचते हैं? मेरी माँ ही मेरी सब-कुछ हैं और उन्हें ये बताने के लिए मेरी टूटी-फूटी भाषा में ये थी मेरी एक कोशिश.....


अच्छा फ्रेंड्स अब मैं चलती हूँ वर्ना ''Electricity'' बहना दोबारा चली जाएँगी..:) और हाँ! आप सब भी मुझे बताइयेगा कि आप सबने मदर्स डे पर अपनी माँ के लिए क्या किया...O.K? और हाँ आज के लिए एक प्रॉमिस- नेक्स्ट टाइम आपसे जल्दी मिलूंगी..


बाय-बाय!!!

Sunday, April 22, 2012

आज है पृथ्वी दिवस



हाँ, आज पृथ्वी दिवस (Earth Day) है... और हर जगह आज इसकी चर्चा भी है... किसी भी स्पेशल दिन पर हम उससे सम्बंधित बातें तो बहुत ढेर सारी करतें हैं लेकिन फिर अगले ही दिन हम सब-कुछ भूल जाते हैं... तभी तो हमारी पृथ्वी दिनों-दिन अपना सौंदर्य खोती जा रही है... लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब तो हम बच्चे भी जागरूक हो रहे हैं... अब हमें भी पता है कि हमारी पृथ्वी को हरा-भरा स्वस्थ और सुन्दर बनाये रखने के लिए हमें पर्यावरण-प्रदूषण को रोकना है, पानी के दुरुपयोग को रोकना है, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों की रक्षा करनी है... हम इसके लिए पूरा प्रयास करेंगे और वो दिन दूर नहीं जब हमारी छोटी-छोटी कोशिशें रंग लायेंगी और हमारी ये ख़ूबसूरत धरती और भी निखर उठेगी...  


To save our Mother Land, 
I also lend my hand... 


पेड़ लगाओ, वृक्ष उगाओ |
धरती माँ को स्वस्थ बनाओ ||


तो आज के इस स्पेशल दिन चलिए मैं आपको एक ऐसी दुनिया में ले चलती हूँ... जो मुझे उतनी ही पसंद है जितनी अपनी पृथ्वी... और ये है मेरे रंगों की इन्द्रधनुषी दुनिया... इस दुनिया में आपको चारों तरफ सुन्दर, चमकीले ढेर सारे रंग ही रंग दिखाई देंगे... बिलकुल वैसे ही जैसे हमारी सुन्दर धरती पर चारों तरफ सुन्दर-सुन्दर रंग बिखरे हैं...... मैं एक एक करके इन सारे रंगों से आपको मिलवाऊँगी.... लेकिन सबसे पहले आइये आपको दिखाती हूँ वो रंग जिसने मुझे मेरी लाइफ का पहला पुरस्कार दिलाकर मुझे बहुत बड़ी खुशी दी थी... और सबसे बड़ी बात ये है कि ये भी हमारी धरती से ही रिलेटेड है... लेकिन रुकिए....मुझे उससे पहले आपको और कुछ भी बताना है....


ये तब की बात है जब मैं यू.के.जी. की वार्षिक परीक्षाएँ देकर खाली ही हुई थी एक दिन मैंने पेपर में एक advertisement देखा... "बिहार राज्य पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड" की ओर से "On spot drawing competition" होने वाला था। मैंने मम्मी-पापा को वो ऐड दिखाया और मेरा नाम मम्मी-पापा ने रजिस्टर करवा दिया....टॉपिक था- रंग बिरंगे फूल, पहाड़, और तितलियाँ आदि....बस फिर किस बात कि देर थी?...शुरू हो गयी मेरी फर्स्ट ड्राइंग कम्पटीशन की तैयारी... आखिरकार कम्पटीशन का दिन आ गया...और मैं पेपर में लिखे पते पर पापा के साथ चल पड़ी....बाप रे!!! वहाँ तो इतने सारे लोग थे.... मैं इतने सारे लोगों का मुकाबला कैसे कर पाउंगी?.....
लेकिन मन में अगर हम कुछ करने की ठान लें तो हमें कोई नहीं रोक सकता..है ना फ्रेंड्स?


सबसे पहले हम जिस जगह पर गए वह एक बड़ा-सा मैदान था और हमें उसी मैदान में बैठकर ही ड्राइंग बनानी थी... हमें एक-एक बड़ी सी ड्राइंग शीट दे दी गई... मैंने अभी अपनी ड्राइंग बनानी शुरू ही की थी कि तभी बारिश शुरू हो गई!!!... इन्द्र भगवान की वर्षा से हम बच्चों की सारी Drawings खराब हो गयीं थीं पर इंद्र भगवान ने अगर गड़बड़ की थी तो उन्होंने ही सब ठीक भी कर दिया और हमारे कम्पटीशन को पोस्टपोन  नहीं होने दिया... वहाँ से हम सब ''बिहार राज्य पर्यावरण प्रदूषण कण्ट्रोल बोर्ड'' के ऑफिस में गए और वहाँ पर अपनी Drawings को कन्टीन्यू किया...

फिर शुरू हो गई मेरी गर्मी की छुट्टियाँ.....मैं मम्मी और भाई के साथ अपने नानी के घर बनारस चल दी..और पापा पटना में ही थे... कुछ ही दिनों बाद उन्हें एक फ़ोन कॉल आया कि आपकी बेटी, प्रांजलि दीप ''बिहार राज्य पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड'' कम्पटीशन में सेकेंड आई है!!!! पापा ने फ़ोन करके मुझे बताया... मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं इतनी अच्छी ड्राइंग करती हूँ!!!... मैं बहुत-बहुत खुश हुई... 


ये रही मेरी सेकेण्ड प्राइज़ विनिंग ड्राइंग और विजेता कप.....


Second Prize
Save Trees... Save Environment


और अगले वर्ष फिर "बिहार राज्य पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड" के द्वारा ये प्रतियोगिता आयोजित की गयी... इस बार मेरी कैटिगरी के लिए विषय था... "हमारी पृथ्वी"  मुझे लगा कि सिर्फ़ हरी-भरी और पानी वाली पृथ्वी तो सभी बनायेंगे लेकिन मुझे भविष्य की पृथ्वी से सबका परिचय करवाना चाहिये... दोस्तों! आप सब तो ये जानते ही होंगे कि यदि हम पृथ्वी के गहनों यानी वृक्षों को काटते हैं तो हम हमारी पृथ्वी को भी हानि पहुंचाते हैं... तो मैंने भी अपनी ड्राइंग के द्वारा यही विचार व्यक्त करने की कोशिश की... आप सब भी देखिये....


Save trees... Save our Mother Land


तो मित्रों, आप समझ गए न कि यदि हम पेड़ों को काटेंगे तो धरती एक दिन यूँ ही टूट कर बिखर जायेगी... और मेरा यह सन्देश शायद निर्णायक मंडल ने समझ लिया...  तभी तो मुझे इस बार प्रथम पुरस्कार मिला... 


First Prize !!!


इन पुरस्कारों की वजह से मेरा नाम पटना के कई अखबारों में भी प्रकाशित हुआ.....





































तो मित्रों अब पृथ्वी के भविष्य को बदलने के लिए हम सभी को हाथ बंटाना होगा, हमारी धरती को हरा-भरा बनाकर.... तो चलिए हम सब आज संकल्प लें कि हम अपनी प्यारी धरती को नष्ट नहीं होने देंगे और धरती के भविष्य को बदल कर दिखायेंगे... !!! 

Happy World Earth Day to all my Friends !!!!  




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