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Sunday, September 9, 2012

आपका नया दोस्त... मेरा प्यारा भाई...


नमस्कार दोस्तों !


 उम्मीद है कि आपको मेरी पिछली पोस्ट की ड्राइंग्स पसंद आईं....

दोस्तों मेरे ब्लॉग को एक साल से अधिक हो गया है और इस दौरान मैंने बहुत से नए दोस्त बनाये... घर पर मेरा एक सबसे अच्छा दोस्त है मेरा छोटा भाई... "शाश्वत दीप"



बहुत समझदार और नटखट है वो और अब वो भी आप सबसे दोस्ती करना चाहता है... और अपनी बातों का पिटारा आप सबके साथ शेयर करना चाहता है... वो कभी-कभी छोटी-छोटी तुकबन्दियाँ... ड्राइंग्स और अन्य चीजें बनाता रहता है और इसलिए उसने मम्मी से कहा कि उसका भी ब्लॉग बना दो जहाँ वो भी अपनी बातें लिखेगा तो मम्मी ने उसकी बात मान  ली... तो लीजिए प्रस्तुत है मेरे भाई के ब्लॉग का पहला
click on the above link to view the blog 

मैं चाहती हूँ कि आप उससे भी मिलिए... उससे दोस्ती कीजिये ... और उसे अपना प्यार, आशीर्वाद और प्रोत्साहन दीजिए... 

बाय!..बाय!..     




Monday, February 27, 2012

भाई ने खाना खाया...





अगस्त २००५... छुकछुक गाड़ी में रुनझुन का एक और सफर... लेकिन इस बार सफर में खेलने के लिए नन्हा भाई भी उसके साथ था... और वो जा रही थी रांची दादा-दादी के पास जहाँ १० अगस्त २००५ को भाई का अन्नप्राशन संस्कार होना था... रुनझुन बहुत ही उत्साहित और कौतूहल से भरी थी... एक नज़र डालते हैं रुनझुन की इस रेलयात्रा पर....   






और अब बात अन्नप्राशन के निमंत्रण-पत्र की... तो इस बार भी निमंत्रण-पत्र हस्त-निर्मित ही था और रुनझुन की ओर से ही था... हाँ... इस बार का सारा निमंत्रण-पत्र कोमल मौसी ने अपने हाथों से बनाया था... और रुनझुन की ओर से लिखा भी उन्होंने ही था... ये रंग-बिरंगा कार्ड रुनझुन को तो बहुत ही पसंद है... ज़रा देखिये आपको कैसा लगता है..... 

















रांची में जगन्नाथ मंदिर में भाई का अन्नप्राशन होना था...रुनझुन बड़े ही उत्साह के साथ वहाँ पहुँची लेकिन नन्ही सी रुनझुन इतनी सारी सीढ़ियाँ देखकर परेशान हो गई.... कैसे चढ़ेगी ???.... आखिरकार दादी की मदद से वो ऊपर पहुँच ही गयी... और... तब... भाई का अन्नप्राशन संस्कार आरम्भ हो गया... कैसे और क्या-क्या हुआ ??... आइये देखते हैं.... 






सबसे पहले मामा ने भाई को मंदिर में भगवन जी का दर्शन कराया.... पंडित जी ने माला पहनाई.... और फिर...


भाई को प्यारी सी छोटी सी धोती पहनाई गई फिर मामा ने चाँदी की कटोरी में चाँदी के चम्मच से भाई को खीर खिलाई... 
( हाँ एक मज़ेदार बात तो बताना भूल ही गई... खाने के मामले में लगता है भाई को कुछ ज्यादा ही हड़बड़ी थी तभी तो भाई का अन्नप्राशन भी पांचवें ही महीने में हो गया और भाई का पहला दांत भी पांचवे महीने में ही निकल आया.)  



फिर सब बहनों ने एक रस्म के मुताबिक बारी-बारी से भाई को प्यार और आशीर्वाद दिया... 



उसके बाद एक बार फिर भाई का गेटअप चेंज किया गया और अब वो नन्हा कान्हा बन चुका था....(टकलू कान्हा...हा-हा-हा) 


अन्नप्राशन के अगले दिन सुबह दादी ने भाई को रसगुल्ला खिलाया... रुनझुन खुश... भाई को तो ठीक से खाना आता नहीं था लेकिन रुनझुन ने मज़े ले-लेकर रसगुल्ले खाए....







रसगुल्ले की पूरी प्लेट रुनझुन के हवाले 

और फिर एक दिन बाद भाई को अनाज यानि दाल-चावल, सब्जियां भी खिलाई गयी... लेकिन रुनझुन ये सोच कर हैरान थी कि सब लोग भाई को खाना खिलाने की इतनी कोशिश क्यों कर रहे हैं...!!!... अभी तो उसके दांत ही नहीं है जब उसके भी रुनझुन जैसे ढेर सारे दांत आ जायेंगे तो वो खुद ही खाने लगेगा...


...लेकिन अब ये छोटी सी बात वो इन बड़े लोगों को कैसे समझाए... 


है कोई तरकीब किसी के पास......?????????? 



Tuesday, January 31, 2012

Runjhun is back again...


लगभग ढाई महीने से रुनझुन के ब्लॉग पर ख़ामोशी थी.... कहीं कोई हलचल नहीं.... किन्तु ब्लॉग पर भले ही कोई हलचल न हो ज़िन्दगी तो हर वक़्त हलचलों से ही भरी रहती है... हर पल कुछ  न कुछ नया घटित होता रहता है.... इस बीच भी बहुत कुछ नया घटित होता रहा... जहाँ एक तरफ दशहरा-दीपावली, नव-वर्ष, मकर संक्रांति, गणतंत्र दिवस, सरस्वती पूजा जैसे हर्षोल्लास भरे पर्व इसी बीच गुज़र गए, वहीं रुनझुन का जन्मदिन भी आकर गुज़र गया... लेकिन इन सबके बीच बहुत ही दुखद रहा रुनझुन की दादी का अकस्मात् गुज़र जाना... ब्लॉग पर ख़ामोशी की प्रथमतः वजह यही थी... और फिर जो एकबार तारतम्य टूटा तो फिर जुड़ने में वक़्त लगता ही चला गया...लेकिन धीरे-धीरे हम सबने खुद को संभाल लिया और वक़्त के साथ ज़िन्दगी रफ़्ता-रफ़्ता अपने ढर्रे पर लौट आई... तो अब रुनझुन भी ब्लॉग जगत में लौट आई है आप सबके पास, आप सबसे बातें करने... 

बीते 7 नवम्बर 2011 को रुनझुन ने अपनी उम्र के दस वर्ष पूरे कर लिए हैं... अपने इस जन्म दिन पर वो अपनी बातें खुद आपसे करना चाहती थी (अब तक रुनझुन की बातें रुनझुन की माँ के द्वारा आप तक पहुँच रही हैं) पर ऐसा हो न सका... संभवतः अगली पोस्ट से रुनझुन अपनी बातें खुद ही आपको बताएगी... लेकिन फिलहाल आज तो रुनझुन की बातों के साथ मैं यानि रुनझुन की माँ हाज़िर हूँ.... और आज मैं आपको रुनझुन के उस साथी या कहिये उस दोस्त से मिलवाने जा रही हूँ जो रुनझुन का सबसे प्यारा साथी है...और वो है रुनझुन का प्यारा-दुलारा छोटा भाई "शाश्वत"....  

3-4 मार्च 2005 की अर्धरात्रि में 12 बजकर तेरह मिनट पर भगवान जी ने रुनझुन को एक बहुत ही प्यारा सा तोहफा दिया और उन्होंने रुनझुन की दुनिया में उसके सबसे प्यारे दोस्त, उसके नन्हे से भाई को उसके पास भेज दिया... 


नन्हा शाश्वत 


उस समय तो रुनझुन घर में नानी के पास सो रही थी... सुबह जैसे ही उसे ये खुशखबरी मिली वो फटाफट तैयार होकर हास्पिटल चल पड़ी अपने नन्हे भाई से मिलने..... 






वहाँ पहुँच मम्मी की बगल में सोये नन्हे-मुन्ने प्यारे से भाई को देखकर तो रुनझुन की ख़ुशी का कोई ठिकाना न था... ख़ुशी से लबरेज रुनझुन के कौतूहल भरे प्रश्नों की तो मानो झड़ी ही लग गई....मम्मी भाई कब जागेगा?...कब वो मेरे साथ खेलेगा?... वो कब बोलना शुरू करेगा?...आदि-आदि...न जाने कितने-कितने प्रश्न... 


हास्पिटल में मम्मी, भाई और कोमल मौसी के साथ  


और उसके बाद तो रुनझुन का ज़्यादातर समय नन्हे भाई के संग ही बीतता... बड़े ही प्यार के साथ कभी वो उससे प्यारी-प्यारी बातें करती... तो कभी उसकी नन्ही-नन्ही कोमल उँगलियों और नाज़ुक नर्म गालों को बड़े कौतूहल और प्यार से सहलाती...तो कभी उसके सामने झुक कर अपने बालों को उसके हाथों से स्पर्श कराके कहती... भाई मेरे बालों को पकड़ो... नन्हा भाई बहना के इस प्यारे से खेल को समझने की कोशिश में उसे टुकुर-टुकुर देखता और वो खिलखिला उठती......  




रुनझुन को भाई से जुड़े हर काम में बड़ा ही मज़ा आता... देखिये कितने प्यार से मौसी के साथ मिलकर रुनझुन ने भाई का पालना सजाया है.... आखिरकार अब रुनझुन बड़ी जो हो गई है.....

पालना सुन्दर लग रहा है न!


नानी और भाई के साथ ख़ुशी से इठलाती रुनझुन 


भाई को गंगे-गंगे कराती रुनझुन 


भाई और अनिकेत के साथ वाटर-पूल में मस्ती 


नाना की गोद में भाई और रुनझुन की गोद में रुनझुन की गुड़िया
है न मज़ेदार !!!!!






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