Sunday, August 28, 2011

दादी अम्मा...





रुनझुन को शुरू से ही हम सब दादी अम्मा बुलाते थे... नन्ही सी बच्ची लेकिन बातें बड़ी-बड़ी, हर काम बहुत ही संभाल के, बेहद सलीके और संजीदगी के साथ करती | सफाई पसंद इतनी की कुछ भी खाते या पीते वक़्त रुमाल हाथ में रखना पड़ता, ज़रा भी मुँह में लगना या गिरना नहीं चाहिए, बिना सैंडल या चप्पल के पाँव ज़मीं पर न रखती | यही नहीं किसी भी चीज़ से डरना तो वो जानती ही नहीं थी सिवा चोट के... जहाँ भी उसे गिरने का खतरा नज़र आता, वहाँ क़दम ही न बढ़ाती और इसीलिए उसे चोट भी बहुत कम लगती और अगर कभी हलकी सी खरोच आ ही जाती तो फिर "चोट-चोट" कहकर दिन-भर हर किसी को दिखाती फिरती, लेकिन इन सबसे उसकी स्फूर्ति में कहीं कोई कमी नहीं आती, पूरी सावधानी के साथ वो अपनी कलाबाजियों में पूरी तरह संलग्न रहती... 

ये देखिये रुनझुन की फेवरेट जगह 

अब तो बेटी को इसपर चढ़ना भी आ गया था 

ये है सबके साथ बराबरी में बैठने के लिए किया गया जुगाड़ 

हमउम्र अनिकेत मामा को प्यारा सा अप्पा 

और अब कुछ कलाबाजियाँ!

सब-कुछ उल्टा-पुल्टा!!! 

"कॉकरोच!" रुनझुन की जिज्ञासा का बहुत बड़ा विषय 

और ये देखिये दीवार पर छिपकली ने कॉकरोच को पकड़ लिया... रुनझुन इस दृश्य को अंत तक बहुत ही विस्मय और दुख के साथ देखती रही...

अरे ये क्या! ... पर्स लेकर बेटी तो चली शॉपिंग करने ...

पर अब आगे कैसे बढ़े!...आगे तो सीढ़ी है!!!

भला अब क्या हुआ! बेटी ने ऐसा क्या देख लिया!!! 

अब इतने अरसे बाद ये बात तो हमें भी याद नहीं, हम तो बस बेटी के आज के साथ उसके कल को भी इस ब्लॉग के माध्यम से साथ-साथ जिए जा रहे हैं...  

Friday, August 26, 2011

दिल्ली की सैर...




रुनझुन तब मात्र एक साल की थी जब लगभग पूरे भारत में कड़ाके की ठण्ड पड़ी थी, कई वर्षों का रिकार्ड भी टूटा था,  इस भीषण ठण्ड से बचने के लिए रुनझुन को प्याज के छिलके की तरह परत दर परत इतने कपड़े पहनाये जाते कि दुबली पतली रुनझुन एकदम गोल-मटोल हो जाती...

नन्ही  Eskimo बुआ नानी के साथ 

गोल-मटोल....मोटू सेठ!

लेकिन ये गुब्बारा तो और भी ज्यादा मोटू है...ही-ही-ही..

Smile please!!!!!!

इसके साथ ही अलाव जलाकर घर को गर्म रखने की कोशिश भी की जाती लेकिन ये सब परेशानी तो मम्मी पापा की थी , बिटिया रानी तो हर हाल में मस्त....



इसी बीच ठंड और कुहरे की चादर लपेटे नया वर्ष भी आ गया और इयर के बर्थडे में केक तो कटना ही था....  

Very-Very Happy New Year!!!

अरे नहीं-नहीं डरिये नहीं इतनी ठण्ड में ये आइसक्रीम नहीं रबड़ी है...

सर्दी हो या गर्मी... रुनझुन का Favorite Sleeping Mode!! 

इतना ही नहीं इसी ठण्ड में रुनझुन दिल्ली भ्रमण पर भी निकल पड़ी देखिये कुछ तस्वीरें कड़कड़ाती, ठिठुरती सर्दी में रुनझुन के दिल्ली भ्रमण की......

सर्दी की मस्ती !!!

पहचाना इसे, ये है दिल्ली का लाल किला 

ये रहा कुतुबमीनार... बाप रे! कित्ताsssssss ऊँचा!!!!!

ये है धुँध में लिपटा Lotus Temple... साथ में अमित भैया और आयुष  मामा 

और अब इसे देखिये दिल्ली का छतरपुर मंदिर 

बता सकते है ये रुनझुन के पीछे क्या है...?

इसे तो आप जानते ही हैं... हाथी!...बड़ाsssss सा !!! 

अब इसे पहचानिए, नहीं समझे, अरे! ये है एक बड़ाsssss सा कछुआ !



Tuesday, August 23, 2011

तेरे रूप अनेक तू एक ही है...



      कुछ तकनीकी परेशानी की वजह से "रुनझुन की बातों" में एक अल्पविराम आ गया था, लेकिन अब सब ठीक है और उम्मीद है कि बातों का ये सिलसिला बिना किसी बाधा के, निरंतरता के साथ आगे जारी रहेगा...कल ही हमने माखन चोर नन्द किशोर का जन्मोत्सव मनाया है इसलिए उन्ही के वंदन और आशीर्वाद के साथ आज की ये पोस्ट उसी नटखट कन्हैया को समर्पित है....

                
                     2003 की श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन नटखट कन्हैया ग्वाल-बालों संग हमारे घर पधारे थे... नहीं विश्वास होता न !..... तो चलिए आप खुद ही उनसे मिल लीजिये...

मुरली बजैय्या...कृष्ण कन्हैया!!!

नटखट नन्द किशोर

करत ठिठोली..संग हमजोली 

नार नवेली... राधा अलबेली !!! 

अच्छी नहीं कान्हा ये तेरी अठखेली...

फोड़ दियो तूने मोरी माखन की मटकी 


और ये रहे...


गोपी और ग्वाल 

आधुनिक पालकी पे सवार...

डाले हाथों में हाथ... चले कान्हा के पास 

तो देखा न आपने...अब तो विश्वास हो गया न...? जी हाँ, ये है हमारी-आपकी, हम सबकी "रुनझुन" कभी नटखट कन्हैया... कभी राधा रानी तो कभी ब्रज की गोरी... हाँ साथ में ग्वाल बने हैं रुनझुन के छोटे से अनिकेत मामा...कैसी लगी बिटिया की ये पावन छवियाँ......?

Sunday, August 7, 2011

परियों की शहजादी...


7 नवम्बर 2002...  ठीक एक वर्ष पूर्व आज ही के दिन हमारे आँगन में ये नन्ही कली खिली थी जिसकी मीठी खुशबू हमारे दिलों से लेकर घर के कोने-कोने में रच-बस गयी है... इस पूरे साल का हर एक दिन... सुबह और शाम... इस नन्ही परी के साथ हमारे जीवन में अनूठी खुशियों की सौगातें लेकर आया था... पल-पल बढ़ती बेटी की नित नवीन छवियों, मन-मोहनी अदाओं से हमारा जीवन खिलखिला उठा था... और उसके जन्म की ये पहली सालगिरह भी कुछ कम अनूठी नहीं थी... आइये आपको भी दिखाते हैं... तितली सी उड़ती... फूलों सी खिलती... परियों की इस शहजादी ने कैसे -कैसे जलवे बिखेरे थे उस दिन.....

as usual सुबह-सुबह गंगे-गंगे...
और फिर दादू के साथ ॐ विष्णु..ॐ विष्णु...(पूजा)...
सारे दिन घर के कामों में मम्मी की मदद और फिर शाम की पार्टी की तैयारी... बहुत-बहुत बिज़ी थी बेटी उस दिन...  

केक सुन्दर है न!... बेटी की ही पसंद है... 
केक काटने के पहले जब सारी मोमबत्तियाँ जल गयी तो दादू डर रहे थे कहीं बेटी जलती कैंडल न छू दे......लेकिन बिटिया रानी की निगाहें तो कहीं और ही टिकी थीं.... 

अचरज भरी निगाहें मोमबत्ती की चमकती लौ को निहार रही थीं ...एकटक ...


और अगले ही पल.....Wow!.... तालियाँ !!...केक कट गया!!!...लेकिन बेटी ने तो इसे छुआ भी नहीं, क्योंकि बेटी को तो मीठी चीजें बिलकुल पसंद नहीं......

ना ! केक भी नहीं.....

कोई बात नहीं केक कट तो गया ही और अब बारी थी सारे गेस्ट को थैंक्यू कहने की...सबने बेटी को अपना ढेर सारा प्यार और उपहार जो दिया था तो बेटी को भी तो रिटर्न गिफ्ट्स देने थे न.... 

बेटी ने उन्हें थैंक्यू कहा...

 उनसे बातें की... प्यारा सा अप्पा भी दिया.... 

और अपने गिफ्ट्स भी दिखाए...


और उसके बाद कुछ देर अपनी फ्रेंड्स के साथ उसे खेलना भी तो था....... लेकिन ये क्या....?........

मुझे वॉकर में नहीं बैठना... मुझे दौड़-भाग कर खेलना है...

...अरे भाई , कोई तो मेरी फ्रेंड को समझाओ... 
खैर... आख़िरकार पार्टी ख़त्म हो गयी.... सब लोग वापस चले गए... लेकिन बिटिया रानी अब भी खुश हैं...पता है क्यों...देखिये तो ज़रा...

 अब मैं कुछ देर अपने खिलौनों और गिफ्ट्स के साथ रहूँगी... 
लेकिन... तभी...
ओफ्फोह! मम्मी क्यों बुला रही है?.....अभी कोई काम बचा है क्या.......!!!

जाना तो पड़ेगा ही .....ह्म्म्म....देखती हूँ क्या काम है....


बेटी तो नहीं समझी, पर आप सब तो समझ गए न!... रात बहुत हो चुकी थी.... सोने का समय हो चुका था और न चाहते हुए भी बिटिया रानी को सोने जाना पड़ा...अगली सुबह पूरे जोश-ओ-ख़रोश के साथ अपने नए-नए-दोस्तों... मेरा मतलब...खिलौनों के साथ खेलने के लिए...इसलिए फ़िलहाल आप सब से भी लेती हूँ विदा अगली मुलाक़ात तक के लिए....नमस्कार!!! 
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