Monday, May 2, 2011

रुनझुन की मस्ती...

आज कुछ बातें रुनझुन की मस्ती की..


हमारी बिटिया रानी शुरू से ही मस्त-मौला थीं,  उतनी ही समझदार और संतोषी भी... रोना तो जैसे वो जानती  ही नहीं थी... जब कभी रुनझुन को भूख लगती तो वो रोने की बजाय खेलते-खेलते धीरे से सो जाती...

मुझे भूख लगी है 

 और हमें खुद ही समझना पड़ता की कब बिटिया को सचमुच नींद आ रही है और कब वो भूख से सो रही है... इसीलिए तो बूआ नानी रुनझुन को तोषी (संतोषी का शॉर्ट फ़ॉर्म) कहकर बुलाने लगीं... और जब पेट भरा हो तो फिर बिटिया की मस्ती के क्या कहने...


 उसकी स्वप्निल आँखें मानो अनजानी कल्पनाओं में खोई रहती...


राजन मामा कहते हमारी परियों की शहजादी शायद परी- लोक की कल्पनाओं में खोई है...

 राजन मामा संग बिटिया - व्हाट ए बैलेंस 

तो कभी वो फूलों सी खिलखिला उठती...


कभी बूआ नानी को तरह-तरह के आसन करके दिखाती मानो कह रही हो आप मेरी तरह आसन करके दिखाइए तो जानू...
बूआ नानी देखिये मैं अपने पैर छू सकती हूँ 
आप ऐसा कर सकती हैं?
ये देखिये अगला आसन 
और अब ये देखिये... है न कमाल!!

तो कभी गोद में आ खिलखिला उठती...

मैं तो गुड़िया मौसी की गोद में आ गई! 

मुझे पकड़ के दिखाओ!! 

लेकिन जब नानी चम्मच से दूध पिलाती तो रुनझुन सचमुच कमाल करती... बहुत देर तक मुँह में दूध लिए नानी को अपलक देखती रहती न दूध अंदर निगलती और न ही बाहर... बेचारी नानी हैरान-परेशान...

नानी दूध नहीं पीना 

 बस चम्मच से दूध पीना ही रुनझुन को बिलकुल पसंद नहीं था वरना तो वो हरदम मस्त रहती....


और जब कभी बहुत देर तक गोद में कहीं बाहर घूम कर वापस लौटती तो हाथ-पैर एकदम सीधे करके अपनी थकान मिटती... आखिर गोद में सिकुड़े-सिमटे बेटी के हाथ-पैर जो दर्द करने लगते...

बहुत थक गई मैं
और ऐसे ही हँसती-मुस्कुराती हमारी बिटिया रानी अपनी प्यारी हरकतों से हम सबको मोहित करते हुए बढ़ने लगी...     


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